Tue Oct 27 09:12:01 IST 2026
नागपुर : 12 वर्षों बाद गोदावरी तट पर होने जा रहे नासिक-त्रयम्बकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला केवल आस्था पर्व नहीं बल्कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए एक महा -अफ़सर है। ऐसा कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष और स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक बालकृष्ण भरतीया ने कहा .
बालकृष्ण भरतीया ने आगे कहा की राजा चंद्रगुप्त मौर्य के दौर में मेले और तीर्थ ही भारत के व्यापार के केंद्र होते थे। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में कहा है फिर मेले और उत्सव ही योगक्षम (व्यापार और रोज़गार) का आधार है. इसी प्रकार प्राचीन आर्थिक मॉडल पर आज के कुंभ के आर्थिक पक्ष को समझने के लिए कैट और स्वदेशी व्यापारी मंच द्वार आयोजित प्रवास यात्रा भरतीया कर रहे हैं. यात्रा के दौरान वे कुंभ से उत्पन्न आर्थिक महत्व नासिक और उसके आस पास के गाँव में समझा रहे हैं . भरतीया ने यात्रा का महत्व समझाते हुए व्यापारी को बताए की इस मेले के समयपूर्व हमें आने वाले आर्थिक महापर्व के लिए महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति मिले इसलिए वस्तुओं का उत्पादन और खेतों में समय पर भुट्टे मकई सलाद की सब्जियां और फल सब्ज़ियों फूल पत्ते सब उपलब्ध हो जाए इसकी हमें तैयारी करना है . कुंभ मेले के लिए देश भर से करोडो लोग नासिक आयेंगे. इसलिए सरकार द्वारा राज्य में सब से बड़ी अस्थाई आर्थिक गतिविधियों का शहर बसाया जाएगा. प्रयागराज में कम से कम दो हज़ार से 3 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक कि अर्थव्यवस्था उत्पन्न कि थी. मानना है कि नासिक सिंहस्थ में भी इतनी ही करोड़ या उससे अधिक के प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष व्यापार कि संभावना है. विषय को विस्तार से समझाते हुए बालकृष्ण भरतीया ने बताए की नासिक के गोदावरी तट के किसानों के फूल फल सब्जी को सीधे बाज़ार मिलेगा. इस से किसान और कृषि को आर्थिक लाभ होगा. देश विदेश से लाखो श्रद्धालुओं के आने से बहुत बड़ी संख्या में पैठानी साड़ियाँ, त्रंबक की रुद्राक्ष माला, ताम्बे पितल के बर्तन, पूजा सामग्री वालों का व्यापार अच्छा होगा.
इसी के साथ साथ अन्य व्यापार खास कर के होटल, लॉज , ट्रांसपोर्ट , होटल सभी को इसका लाभ मिलेगा . करीब दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने से होटल के साथ ऑटो, टैक्सी टेंट स्टॉल वालों को बड़े पैमाने पर रोजगार निर्मित होगा. स्थानीय युवाओं को भी सुरक्षा संबंधित कार्य, स्वच्छता, डिजिटल सेवाएं, फोटोग्राफ सेवा आदि में अस्थाई रोजगार एक लाख से अधिक अवसर उत्पन्न होगें. इस मौके पर स्थानीय व्यापारियों को समझौते हुए बालकृष्ण भरतीया ने सहज भाव से समझाया की नासिक ब्रांड ग्लोबल का प्रमोशन करने की यह एक सुनहरा अफ़सर नासिक के लोगों को मिलेगा. कुंभ के कारण नासिक के अंगूर, वाइन, पाव-मिसाल और त्रयम्बकेशरी ज्योतिर्लिंग अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में जाएगा. बालकृष्ण भारतीय की शासन से माँग है की कुंभ क्षेत्र में स्थानीय उत्पादक के लिए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट, वोकल फॉर लोकल तथा लोकल गो ग्लोबल के विशेष स्टाल जगह जगह आरक्षित किए जाए ताती लाभ बड़े कॉर्पोरेट को नहीं बल्कि स्थानीय लोगों को तथा स्वदेशी वस्तुओं को मिले. शासन ने इसका व्यापक प्रचार प्रसार कर के स्थानीय लोगों को जागरूक करके समझा चाहिए की कुंभ मेले में नासिक और उसके आस पास के सभी क्षेत्रों में स्थानीय स्वदेशी वस्तुओं को बहुत बड़ा भंडारण करना चाहिए. कृषक लोगों ने भुट्टा, मूंगफली, सलाद में लगनेवाली सब्ज़ियों अन्य फल सब्जी, फरसान बनाने वालों ने अपनने सभी उत्पाद भड़भुँजे वालों ने अपनने सभी उत्पाद आदि बड़ी मात्र में संग्रह कर के रखना चाहिए. होटल लॉज ने ज़्यादा से ज़्यादा पलंग विस्तार आदि की सुविधाएं रखनी चाहिए. स्थानीय बैंको छोटे छोटे व्यापारियों को मुद्रा लोन योजना के अंतर्गत हर प्रकार के व्यवसायियों को ज़्यादा से ज़्यादा मात्रा में ऋण उपलब्ध करा के देना चाहिए. यह मेला नासिक ही नहीं अपितु पूरे महाराष्ट्र राज्य की आर्थिक व्यवस्था और रोजगार उत्पन्न के माध्यम से कार्य करना चाहिए .